मंगलवार, 4 जनवरी 2022

316-मन के पूरब में- भोर की लालिमा

 




8 टिप्‍पणियां:

  1. दोनों ही रचनाएंँ अति सुन्दर।💐

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  2. सुंदर रचनाओं को पढ़ने का मौका मिला इसके लिए आप दोनों की लेखनी को धन्यवाद और दिल से शुभकामनाएंँ।

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  3. अतिसुन्दर भावयुक्त रचनाएँ बधाई

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  4. ढूंढती रही
    बर्फीली नगरी में
    नेह की आंच


    ये हाइकू मात्र शब्दों का गठबंधन नहीं जीवन में प्यार के अभाव को ह्रदय में उतरता अर्थपूर्ण सार्थक सफल प्रयास है बधाई

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  5. आद. कमला जी अति सुंदर भावपूर्ण हृदयस्पर्शी हाइकु के लिए आपको अजस्र शुभकामनाएँ एवं बधाई... 🌹🌹🌹
    आद. कविता जी आपकी रचना सदैव झंकृत होती है मन की गहराई में पढ़ने के पश्चात्.. नमन 🌹🙏

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  6. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी एक रचना शुक्रवार ७ जनवरी २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।
    नववर्ष मंगलमय हो।

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  7. दोनों रचनाएँ बहुत सुन्दर. आप दोनों को हार्दिक बधाई.

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  8. कविता भट्ट जी की भावपूर्ण रचना एवं कमला जी के मनभावन हाइकूओं के लिए दोनों कवयित्रियों को बधाई।

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