शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021

219- इतना प्यार

1-डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री'    



















2-परमजीत कौर 'रीत'

1

सिंदूरी सूर्य

धरा को रँगकर

खेलता फाग

 सिंदुरि सुर्ज

पिर्थी रंगै कैं बल

खेलदु फाग

2

निशा- चूनरी

चन्द्रमा रँगरेज

चाँदनी रँगे

 रात च चुन्नी

जून रंगण वाळि 

जुनाळि रंगु

3

पूर्णिमा-चाँद

सागर-मन ज्वार

कल्पों का नेह

 पूर्णिमैं जून

समोद्र मन ज्वार

कलप्वी माया

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी रचना है...। बधाई

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  2. बधाई परमजीत रीत व शैलपुत्री जी। अच्छी रचनाएं

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  3. बहुत सुन्दर रचनाएँ!
    प्रिय डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री जी एवँ परमजीत जी को हार्दिक बधाई।

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  4. नीलांबरा एवं आपका हार्दिक आभार।

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