मंगलवार, 10 नवंबर 2020

176-प्रथम अनिवार्य प्रश्न-सा

प्रथम अनिवार्य प्रश्न-सा

डॉ.कविता भट्ट 'शैलपुत्री'

 

पहाड़ियों से बहती बयार;

मेरे तन-मन को छूकर

संगीत के साथ बहती है;

चढ़ाई-उतराई की पीड़ा को

कर्णप्रिय स्वरलहरी में बदलने हेतु

सक्षम है; अतः मेरे लिए विशेष है।

 

मेरे तथाकथित घर की

खिड़की से दिखती है

एक नदी, जिसकी मृदु-तरंगित लहरें

कठोर सीने वाले पत्थरों पर

संघर्ष से सफलता लिखने हेतु

सक्षम हैं; अतः मेरे लिए विशेष है।

 

और हाँ दिखता है एक पीपल भी

दूर पर्वत की चोटी पर खड़ा

कर्मयोगी-सा तपस्यारत

सबके बीच रहकर भी है विरक्त

बिना प्रतिदान चाहे, प्राणवायु बाँटने हेतु

सक्षम है;- अतः मेरे लिए विशेष है।

 

बहती बयार, नदी की लहरों

और कभी-कभी पीपल बन


परीक्षापत्र के प्रथम अनिवार्य प्रश्न
-सा

एक प्रश्न, जो उठता ही रहता है

प्रायः मेरे व्याकुल मन में;

'हम' विशेष क्यों नहीं हो सके?

-0-

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उदन्ती 


4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 10
    नवंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. हम विशेष क्यों नहीं हो सके ? सारगर्भित प्रश्न के साथ सुंदर पंक्तियाँ...

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