सोमवार, 5 नवंबर 2018

87-सर्दी के हाइकु


सर्दी के हाइकु
 डॉ .कविता भट्ट
1
सर्दी में ली थी
गरमी में लौटाई
उसने धूप
2
स्पर्श तुम्हारा 
भिखारी को कम्बल 
शीत-प्रतीक्षा

3
तुम्हारा प्रेम-
गरीब को अलाव 
मात्र सहारा
4
कभी तो चखो
सर्दी में हलुवे -सी
मेरी प्रीत है
5
तुम्हारा आना   
सर्दी में लिहाफ-सा
साँसें दहकी
6
छीन न लेना
एक ही लिहाफ है 
तेरी प्रीत का
7
शीतनिशा है
जीवन का संघर्ष 
तू रवि- रश्मि
8
करवा चौथ
मैं हूँ प्रतीक्षारत  
तुम हो चाँद
9
हुआ विलम्ब
तुम्हें आने में प्रिय
श्वेतकेशा मैं
10
जीवन भर
अँगीठी -सी सुलगी
मन क्यों सीला
-०-

17 टिप्‍पणियां:

  1. आपके हाइकु पढ़कर मन अभिभूत हो गया। शब्द अपने आप में निर्जीव होते हैं।कुशल शब्द शिल्पी का स्पर्श पाकर जैसे शिलाखण्ड मोहक मूर्ति का जीवंत रूप धारण कर लेता हैं , उसी प्रकार ।आपने कम्बल ,अलाव,हलुवा ,लिहाफ़,अँगीठी के नायाब प्रयोग किए हैं । उपमान योजना में साधारण और प्रचलित शब्दों को लिया और उन पर मोतियों की आब दे दी। आज आपके दसों हाइकु का भाव और शिल्प सौन्दर्य हृदयस्पर्शी बन गया है ।]

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  2. हार्दिक आभार, महोदय, आपका आशीर्वाद बना रहे।

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  3. कविता जी के हाइकू १० -सवा लाख के समान हैं |
    इनके हर शब्द एक नयी जान है |
    जीवन के कटू सत्य के निशान हैं ,
    कविता की सच्ची पहचान है |
    बार -बार पढने को मन करता है - श्याम त्रिपाठी हिन्दी चेतना

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    1. महोदय, प्रणाम। आपका आशीर्वाद मेरी ऊर्जा है। सदैव आशीष बनाये राखिएगा। हार्दिक आभार।

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  4. महोदय, प्रणाम। आपका आशीर्वाद मेरी ऊर्जा है। सदैव आशीष बनाये राखिएगा। हार्दिक आभार।

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  5. मन मुग्ध करते सुंदर हाइकु ।बहुत-बहुत बधाई आपको।

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  6. बहुत ही भावपूर्ण हाइकु।
    नमन आपकी लेखनी को

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  7. बहुत ही प्यारे तथा भावपूर्ण हाइकु रचे हैं कविता जी
    बहुत -बहुत बधाई आपको !

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  8. बहुत सुन्दर हाइकु, सभी भावप्रवण! बधाई कविता जी.

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